बेनाम
बेटे ने अपने बूढ़े बाप को दिन के उजाले में मोमबत्ती की रौशनी में कुछ ढूंढ़ते हुए देखा तो पूछ बैठा ऐसा क्या ढूँढ़ रहे है आप जिसके लिए मोमबत्ती जलानी पड़ी? बाप ने निश्वास छोड़ते हुए कहा ,अपना नाम जिसे मै गाँव से लाया तो साथ था लेकिन यहाँ न जाने कहा गुम हो गया की मिलता ही नहीं इसी वजह से सब मुझे गौरव के पिताजी कहकर बुलाते है यंहा तक कि मेरी उम्र के लोग भी । बेटे ने ठहाका लगाया बोला इसी लिए मैंने सोच लिया है कि गाँव की जमीन बेंचकर मै अपने नाम से स्कूल खोलूंगा जंहा मेरी खुद की पहचान होगी न की मेरे बेटे या पोते की और फिर मुझे आप की तरह दिन के उजाले में मोमबत्ती के सहारे अपना नाम नहीं ढूँढना पड़ेंगा । बाप ने एक और गहरी साँस ली और अपने आने वाले कल पर हंसा क्योकि कल से वह अपने गाँव में भी बेनाम हो जायेगा ।
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